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शिप्रा किनारे से शराब दुकानें हटवाने संत और संगठन आंदोलन की तैयारी में
उज्जैन | राज्य सरकार द्वारा नर्मदा किनारे से शराब दुकानों को हटाने और उनकी नीलामी नहीं करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में शहर के नागरिक शिप्रा किनारों से भी शराब दुकानें हटाने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं। इस अभियान में शहर के सभी वर्ग और समुदायों ने सरकार से शिप्रा को भी शराब दुकानों से मुक्त करने के लिए आग्रह किया है।
मंगलवार को राष्ट्रीय युवा फोरम के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, नंदकिशोर बैरागी, हुकमचंद बल्दिया, अनिल गुप्ता, सुनील व्यास ने कलेक्टर संकेत भोंडवे से मिल कर ज्ञापन दिया। अग्रवाल ने बताया नर्मदा की तरह शिप्रा किनारे से भी शराब दुकानें हटाने के लिए कलेक्टर से निर्देश जारी करने को कहा है।
जनसमर्थन के लिए आश्रमों में अलख जगेगा
शराब दुकानें हटाने के लिए एकजुट हो रहे संतों के आश्रमों में अब आंदोलन का अलख जगेगा। मंगलवार को सारी-बारी आश्रम में संतों और नागरिकों की बैठक हुई।
संत समिति अध्यक्ष महंत दिग्विजयदास के अनुसार बैठक में शिप्रा किनारे से शराब दुकानें हटाने का निर्णय यदि सरकार नहीं लेती है तो आंदोलन करने का निर्णय लिया। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया जा चुका है। तय किया कि हर आश्रम में आंदोलन को लेकर बैठक होगी तथा जनसमर्थन खड़ा किया जाएगा। नौ फरवरी को नीलामी नहीं रोकी तो संत धरना आंदोलन शुरू कर देंगे।
जनसमर्थन के लिए आश्रमों में अलख जगेगा
शराब दुकानें हटाने के लिए एकजुट हो रहे संतों के आश्रमों में अब आंदोलन का अलख जगेगा। मंगलवार को सारी-बारी आश्रम में संतों और नागरिकों की बैठक हुई। संत समिति अध्यक्ष महंत दिग्विजयदास के अनुसार बैठक में शिप्रा किनारे से शराब दुकानें हटाने का निर्णय यदि सरकार नहीं लेती है तो आंदोलन करने का निर्णय लिया। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया जा चुका है। तय किया कि हर आश्रम में आंदोलन को लेकर बैठक होगी तथा जनसमर्थन खड़ा किया जाएगा। नौ फरवरी को नीलामी नहीं रोकी तो संत धरना आंदोलन शुरू कर देंगे।
शराब दुकानें हटाने के लिए एकजुट हो रहे संतों के आश्रमों में अब आंदोलन का अलख जगेगा। मंगलवार को सारी-बारी आश्रम में संतों और नागरिकों की बैठक हुई। संत समिति अध्यक्ष महंत दिग्विजयदास के अनुसार बैठक में शिप्रा किनारे से शराब दुकानें हटाने का निर्णय यदि सरकार नहीं लेती है तो आंदोलन करने का निर्णय लिया। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया जा चुका है। तय किया कि हर आश्रम में आंदोलन को लेकर बैठक होगी तथा जनसमर्थन खड़ा किया जाएगा। नौ फरवरी को नीलामी नहीं रोकी तो संत धरना आंदोलन शुरू कर देंगे।
समाज भी आए दुकानों के विरोध में
महाराष्ट्र समाज के सुभाष अमृतफले का कहना है शिप्रा किनारे से भी शराब दुकानें हटना चाहिए। इसके लिए जो अभियान चल रहा है, उसमें हमारा समर्थन है। इस संबंध में कलेक्टर को भी पत्र देकर दुकानें हटाने की मांग करेंगे। जैन समाज के अनिल गंगवाल के अनुसार समाज शराब और मांस दुकानों को हटाने के पक्ष में है। समाज की होने वाली बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर कलेक्टर और राज्य सरकार को देंगे ताकि दुकानें हटाई जा सके।
महाराष्ट्र समाज के सुभाष अमृतफले का कहना है शिप्रा किनारे से भी शराब दुकानें हटना चाहिए। इसके लिए जो अभियान चल रहा है, उसमें हमारा समर्थन है। इस संबंध में कलेक्टर को भी पत्र देकर दुकानें हटाने की मांग करेंगे। जैन समाज के अनिल गंगवाल के अनुसार समाज शराब और मांस दुकानों को हटाने के पक्ष में है। समाज की होने वाली बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर कलेक्टर और राज्य सरकार को देंगे ताकि दुकानें हटाई जा सके।
सिख समाज के जत्थेदार सुरेंद्रसिंह अरोरा ने बताया शिप्रा किनारे से सात दुकानें हटाई जाती है तो भी सरकार की आय पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह राशि अन्य दुकानों पर सरकार आरोपित कर सकती है। दुकानें हर हाल में हटाना चाहिए।
पांचाल समाज के प्रमुख जगदीश पांचाल ने कहा शिप्रा और महाकाल से ही शहर की पहचान है। प्रशासन कुछ करे या न करे, जनता यदि आगे आ गई तो दुकानें हटना तय है।